24 घंटे के अंदर सुलझ गया कमलेश तिवारी हत्याकांड का केस : यूपी डीजीपी
18 अक्टूबर को लखनऊ में हुए कमलेश तिवारी हत्याकांड का केस 24 घंटे के अंदर ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने सुलझा लिया है। 18 अक्टूबर को लखनऊ में हिंदू समाज पार्टी के संस्थापक कमलेश तिवारी जी दिनदहाड़े गला रेतकर और गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्यारे मिठाई के डब्बे में चाकू लेकर आए थे और उन्होंने कार्यालय के अंदर ही हिंदू समाज पार्टी के संस्थापक की गला रेत कर हत्या कर दी। हत्यारों ने भगवा रंग का कुर्ता भी पहन रखा था ताकि किसी को शक न हो।
उत्तर प्रदेश सरकार पर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे थे। विपक्षी पार्टियों के अलावा प्रदेश की जनता ने भी उत्तर प्रदेश सरकार को लेकर कई तरह के सवाल दागे। मगर पुलिस की सक्रियता के कारण 24 घंटे के अंदर ही इस मामले के आरोपियों का पता चल गया। उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने स्वयं इस बात को स्वीकार किया है कि मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके तार सूरत से भी जुड़े हुए हैं।
2015 की बात का बदला लेने के लिए किया गया कमलेश तिवारी हत्याकांड
दरअसल कमलेश तिवारी के हत्या 2015 के एक बयान को लेकर की गई। कमलेश तिवारी ने मुसलमानों की प्रमुख पैगंबर मोहम्मद को लेकर एक आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। जिसके बाद पूरा मुसलमान समुदाय काफी आक्रोशित हो गया था। उस समय कमलेश तिवारी की हत्या करने पर कई लाख रुपए के इनाम रखे गए थे। जिसके पास उत्तर प्रदेश सरकार ने तिवारी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी कि रासुका लागू कर दिया था। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कमलेश तिवारी से रासुका हटा ली थी।
यह लोग हैं हत्या के साजिशकर्ता
दरअसल उत्तर प्रदेश पुलिस में पता लगा लिया है कि हत्या की साजिश करने में कौन शामिल है। कमलेश तिवारी हत्याकांड में मौलाना अनवारुल हक और मौलाना नईम कासमी शामिल हैं। इसके अलावा सूरत के सलीम शेख, फैजान और राशिद ने भी इसमें हिस्सा लिया था। राशिद ने शुरुआती प्लान बनाया था। जिसके तहत अनावरूल हक और कासमी मुख्य साजिशकर्ता बने।
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